Wednesday, September 12, 2007

साया........

फिर किसी याद ने रात भर है जगाया मुझ्को क्या सज़ा दी है मोहबत ने खुदाया मुझको
दिन को आराम है ना रत को है चेन कभी जाने किस ख़ाक से कुदरत ने बनाया मुझको
दुःख तो यह है कह ज़माने मैं मिले घिर सभिजो मिला है वोह मिला बन के पराया मुझको
जब कोई भी ना रह कन्धा मेरे रोने कोघर कि दीवारों ने सीने से लगाया मुझको
अब तो उम्मीद-ए-वफ़ा तुम से नहें है कोइफिर चराँगो कि तरह किस ने जलाया मुझको
बेवफा जिन्दगी ने जब छोर दिया है तान्हामौत ने प्यार से पहलू मैं बिठाया मुझको
वोह दिया हूँ जो मोहब्बत ने जलाया था कभिघम कि आंधी ने सुबह और शाम बुझाया मुझको
कैसे भूलों गा तेरे साथ गुजरा लम्हा याद आता रह जुल्फों का ही साया मुझको.....

Labels:

Thursday, September 6, 2007

साँसे चुभती हैं

साँसे चुभती हैं

साँसे चुभती हैं मेरे सीने मई खंजर कि तरह

जिन्दगी लगती है अब दूर के मंजर कि तरह

एक भी कतरा मुहब्बत का मुकद्दर ना बना

हम भटकते रहे दुनिया मैसमंदेर कि तरह

दूर तक अपने सिवा कुछ भी ना देखा उसने

हम खडे रह गए बस्स राह केमंजर कि

उनकी यादों से कहो कोई नया घरढूँढें

जिंदगी अपनी है गिरते हे खंडहर कि तरह

Labels:

Is anjnabi duniya mein,Akela ek khawaab hu,

इस ajnabi दुनिया में,अकेला एक खवाब हु,
सवालो से खफा,छोटा एक जवाब हु,
जो ना समझ सके,उनके लिए "कौन",
जो समझ चुके,उनके लिए किताब हु ,
दुनिया कि नज़र में,जाने क्यों चुभा सा,
सबसे नशीली और बदनाम शराब हु,
सर उठाकर देखो,वो देख रह हाइ तुमको,
जिसको ना देखा उसने,वो चमकता आफ़ताब हु,
आंख से देखोगे,तो खुश पाओगे,
दिल से पूछोगे,तो दर्द का सैलाब हु .........!!! !

Labels:

शेहनाई के सिवा!!

ओर कोई गम नही एक तेरी जुदाई के सिवा,
मेरे हिस्से मे क्या आया तनहाई के सिवा!
यु तो मिलान कि राते मिली बेसुमार,
प्यार मे सब कुछ मिल शेहनाई के सिवा!!

Labels:

Tuesday, August 14, 2007

क्या फाइदा...!!!

भूलने वाले से कोई कह दे इस तरह याद आने से क्या फाइदा,
जब मेरे दिल कि दुनिया बसती नहिंफिर ख्यालों में आने से क्या फाइदा
क्या कहूं आपसे कितनी उमीदें थी आप क्या बदले दुनिया बदल सी गयी
आसरा दे के दिल तोड़ ते हैं इस तरह सताने से क्या फाइदा
चार तिनके जला के क्या मिल गयामित सकना ज़माने से मेरा निशाँ
मुझपे बिजली गिरो तो जानू सही आशियाने पर गिराने से क्या फाइदा...!!!

Labels:

ये इश्क नही आसा......

ये इश्क नही आसा......

वो बोले .....
ये इश्क नही आसा, इतना तो समझ लिजिये...
एक आग का दरिया है, और डूब के जाना है ....

*****************

मैंने कहा...

मासूम सी मोहब्बत का बस्स इतना सा फ़साना है..
कागज कि हवेली है, बारिश का ज़माना है..
क्या शर्त-ए-मोहब्बत है, क्या शर्त-ए-ज़माना है..
आवाज़ भी जख्मी है और वो गीत भी गाना है..
उस पर उतरने कि उम्मीद बहुत कम है..
कश्ती भी पुरानी है, तूफ़ान भी आना है..
समझे या ना समझे वो अंदाज़-ए-मोहब्बत का..
भीगी हुई आँखों से एक शेर सुनाना है..
भोली सी अड़ा, कोई फिर इश्क कि जिद पर है..
फिर आग का दरिया है.. और डूब ही जाना है ...

Labels:

मुझे बाहों में बिखर जाने दो

मुझे बाहों में बिखर जाने दो अपनी मुश्कबार सासों से महक जाने दो…
दिल मचलता है और सांस रूकती है,अब टोह सीने में आज मुझे उतर आने दो
अपनी मुश्कबार सासों से महक जाने दो…
शोख नज़रों को शर्म आती है,थरथराते हुए लबों को चेन पाने दो
अपनी मुश्कबार सासों से महक जाने दो…
रात तनहा है और सर्द मौसम है,शोला-ए-एहसास को अब और भड़क जाने दो
अपनी मुश्कबार सासों से महक जाने दो…
बहके हैं हम फिजा जो बहकी है,दिल को दिल रूह को रूह में समां जाने दो
अपनी मुश्कबार सासों से महक जाने दो…
बिखरे गेसू हैं बिखरा काजल है, हौले हौले इस शब् को तुम गुज़र जाने दो
अपनी मुश्कबार सासों से महक जाने दो…
अभी और भी अरमान दिल मे बाक़ी है,युहीं बाहों में इस रात को कट जाने दो
अपनी मुश्कबार सासों से महक जाने दो…
मुझे बाहों में बिखर जाने दो अपनी मुश्कबार सासों से महक जाने दो…

Labels:

Thursday, August 2, 2007

लौट आओ!

शबनमी रात सुहानी है,
एक ग़ज़ल तुम को सुनानी है, लॉट आओ!
फिर नया ख़्वाब देखना है सेहेर होने तक,
फिर नयी शमा जलानी है, लौट आओ!
ना मैं बरबाद हुई हूँ, ना रुसवा तुम,
ना-मुकम्मल ये कहानी है, लौट आओ!
तुम से मिल कर हे मैं बिछङू, कोई लाजमि तो नही,
फिर भी एक रस्म निभानी है, लौट आओ...! !!

Labels:

Sunday, July 29, 2007

एक दिन उन्हें ना देखा तो दिल उदास हो गया,
कुछ ही पल मे वो इतना खास हो गया,
अब तक तो पता नही था मुझे,
लेकिन उनकी जुदाई से प्यार का एहसास हो गया

Labels:

Saturday, April 28, 2007

I wish for you...


I wish for you...Comfort on difficult days,
Smiles when sadness intrudes,
Rainbows to follow the clouds,
Laughter to kiss your lips,
Sunsets to warm you heart,
Gentle hugs when spirits sag,
Friendship to brighten your being,
Beauty for your eyes to see,
Confidence for when you doubt,
Faith so you can believe, Courage to know yourself,
Patience to accept the truth,
And love to complete your life.

Labels:

Nikla subha ko jo sar e sham un ko dhulna hai

Nikla subha ko jo sar e sham un ko dhulna hai

her aik ko yahan apni manzal tarak palatna hai

bus itna qurb tera mere liaye kafi hai

aik patri ki tarah sath sath chalna hai

apny gasoon main saja lo enayat ker do

phool hon meri qismat to bokhaerna hai

mil gaya jo achanak usay na jany

dokitna mushkil yahan khoye hoye milna hai

kuch nahi ho ga tera jawo Najam kam karo

teri fitrat main kahan apni khudi se hutna hai

Labels: