Sunday, August 19, 2007

सिनेमा भी उधार देखा है...

यूसुफ़ का हुस्न, जुलेखा का घुमार देखा है,कुछ इस तरह से हसीनों का प्यार देखा है,
उन्हें खिलने पिलाने मैं हुई है यह हालत,कसम खुदा कि..सिनेमा भी उधार देखा है...

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